Saturday, May 14, 2011

अचानक में मन में वह क्रोध का विचार आया। कही क्रोध के कारण तो भय रूपी जड़ों को आज भोजन तो नहीं मल गया। भय रूपी अंधेरे में दबी उन जड़ों को भोजन क्रोध और

c क्रोधी आदमी कायर होता है। आपने भय को छुपने के लिए हिंसा करता है, ताकी उसे पता न चले की मैं कमजोर हूं। बुद्ध महावीर प्रेम से भरे है उनके पास कोई हिंसा नहीं हे। ये सुत्र जब अपने जीवन में घटते देखा तब अंदर जाकर मेंने देखा प्रेम, स्नेह हमे अभय देता है। क्रोध, अहंकार हमारे भय को पोषित करता है।

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